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ग्रह अवस्था तालिका

ग्रह-अवस्था ग्रहों की "मनोदशा" जाँचने की शास्त्रीय विधि है — एक ही राशि में बैठा ग्रह किस अंश पर है, जाग्रत है या सुप्त, प्रसन्न है या दुखी — फल इन सबसे बदलता है।

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ग्रह अवस्था तालिका के बारे में

यह तालिका तीन प्रमुख अवस्थाएँ दिखाती है: बालादि अवस्था (अंश-आधारित आयु: बाल-कुमार-युवा-वृद्ध-मृत — युवा ग्रह पूर्ण फल देता है, मृत नाममात्र); जाग्रतादि अवस्था (जाग्रत-स्वप्न-सुषुप्ति — चेतना-स्तर); और दीप्तादि अवस्था (दीप्त-मुदित-दुखी आदि नौ भाव-दशाएँ)।

यही कारण है कि एक ही राशि-भाव के दो ग्रह अलग फल देते हैं। FeelAstro की अवस्था तालिका नौ ग्रहों की तीनों अवस्थाएँ एक साथ दिखाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रह-अवस्था क्या है?

ग्रह की सूक्ष्म स्थिति-दशा — अंश, राशि-संबंध और युति-दृष्टि से निर्धारित "मनोदशा", जो बताती है कि ग्रह अपना फल कितनी मात्रा और गुणवत्ता से देगा।

बालादि अवस्था क्या है?

राशि के अंशों के पाँच भाग — बाल (शिशु), कुमार, युवा, वृद्ध और मृत। युवा अवस्था का ग्रह पूर्ण फल देता है, बाल-वृद्ध आंशिक और मृत नाममात्र। विषम-सम राशियों में क्रम उल्टा होता है।

जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति अवस्था का क्या अर्थ है?

ग्रह की चेतना-दशा: जाग्रत (उच्च/स्वराशि में) — पूर्ण सजग फल; स्वप्न (मित्र/सम राशि) — मध्यम; सुषुप्ति (शत्रु/नीच) — मंद फल।

दीप्तादि अवस्थाएँ कौन-सी हैं?

नौ भाव-दशाएँ — दीप्त, स्वस्थ, मुदित, शांत, शक्त/दीन, दुखी, विकल, खल, कोपयुक्त आदि — जो ग्रह की गरिमा, युति और दृष्टियों से बनती हैं और फल का "स्वाद" बताती हैं।

अवस्था-विश्लेषण का उपयोग कब करें?

जब दो कुंडलियों में ग्रह समान राशि-भाव में हों पर फल भिन्न दिखें, या किसी दशा का सूक्ष्म फल आँकना हो — अवस्था वही बारीक अंतर पकड़ती है जो स्थूल विश्लेषण से छूट जाता है।