विवाह मिलान रिपोर्ट (गुण मिलान)
कुंडली मिलान (गुण मिलान) विवाह से पूर्व दो कुंडलियों की अनुकूलता जाँचने की शास्त्रीय विधि है। यह कैलकुलेटर दशकूट प्रणाली से पूर्ण मिलान रिपोर्ट बनाता है — दोनों के नक्षत्र, चंद्र राशि और लग्न से लेकर कूट-दर-कूट अंक तक।
हमारे ज्योतिषियों से पूछें
आपका प्रश्न सार्वजनिक पर गुमनाम रहता है — नाम व जन्म विवरण कभी नहीं दिखते। आपकी सहेजी कुंडली निजी रूप से जुड़ती है ताकि ज्योतिषी आपकी वास्तविक कुंडली से उत्तर दे सकें।
🎁 हर बार जब आपका सवाल approve होता है, आपको AI ज्योतिषी से 1 मुफ़्त सवाल मिलता है।
सवाल पूछने के लिए अपना WhatsApp नंबर verify करें — कोई खाता या पासवर्ड नहीं चाहिए, एक कोड से सब हो जाता है।
हम आपको WhatsApp पर 6 अंकों का कोड भेजेंगे। आपका नंबर कभी publicly नहीं दिखता।
पहले से email से FeelAstro इस्तेमाल करते हैं? लॉग इन करें या मुफ़्त खाता बनाएँ
विवाह मिलान रिपोर्ट (गुण मिलान) के बारे में
दशकूट प्रणाली में दस कूटों — दिन, गण, महेन्द्र, स्त्री-दीर्घ, योनि, राशि, राश्यधिपति, वश्य, रज्जु और वेध — के आधार पर 36 में से अंक दिए जाते हैं। 18 से ऊपर का मिलान सामान्यतः स्वीकार्य और 24+ अच्छा माना जाता है।
अंकों के साथ-साथ रिपोर्ट पापसाम्य की गणना भी करती है — दोनों कुंडलियों में लग्न, चंद्र और शुक्र से पाप-ग्रहों (मंगल, शनि, राहु आदि) का भार तुलनीय होना चाहिए। केवल गुण-अंक देखना अधूरा मिलान है; पापसाम्य और सप्तम-नवमांश का बल भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अपना विवरण भरें, फिर साथी का — रिपोर्ट तुरंत बन जाती है, बिल्कुल मुफ़्त।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुंडली मिलान में कितने गुण मिलने चाहिए?
दशकूट प्रणाली में 36 में से 18 से ऊपर सामान्यतः स्वीकार्य, 24-28 अच्छा और 28+ उत्तम माना जाता है। किंतु अंक अकेले निर्णायक नहीं — पापसाम्य और मंगल दोष की जाँच भी आवश्यक है।
दशकूट और अष्टकूट में क्या अंतर है?
उत्तर भारत में प्रचलित अष्टकूट आठ कूटों पर आधारित है, जबकि दक्षिण परंपरा की दशकूट प्रणाली दस कूट जाँचती है — जिनमें रज्जु और वेध जैसे महत्वपूर्ण कूट भी शामिल हैं जो अष्टकूट में नहीं होते।
पापसाम्य क्या है?
दोनों कुंडलियों में लग्न, चंद्र और शुक्र से पाप-ग्रहों के प्रभाव की तुलना। दोनों का पाप-भार लगभग बराबर हो तो विवाह संतुलित रहता है; एक पक्ष का भार बहुत अधिक हो तो अन्य उपाय-विश्लेषण आवश्यक है।
क्या कम गुण मिलने पर विवाह नहीं हो सकता?
कम अंक सावधानी का संकेत हैं, निषेध नहीं। कई कूट-दोषों के शास्त्रीय अपवाद हैं, और नवमांश-सप्तम का बल या गुरु की शुभ दृष्टि कमी की भरपाई कर सकती है। पूर्ण विश्लेषण किसी योग्य ज्योतिषी से करवाएँ।
मिलान के लिए क्या-क्या जानकारी चाहिए?
दोनों की जन्म तिथि, सटीक जन्म समय और जन्म स्थान। लिंग भरने से वर-वधू की भूमिका सही निर्धारित होती है। जानकारी केवल आपके ब्राउज़र सेशन में रहती है।