अंशावतार योग कैलकुलेटर
अंशावतार योग — दिव्य अंश के अवतरण का योग — शनि, शुक्र और गुरु की अति-विशिष्ट संगति से बनता है: उच्च शनि-शुक्र केंद्र में हों और लग्न-नवांश से जुड़ी शर्तें पूरी हों।
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अंशावतार योग कैलकुलेटर के बारे में
तप (शनि), रस (शुक्र) और ज्ञान (गुरु) — तीन विपरीत धाराओं का उच्च-बल संगम ही "अंशावतार" कहा गया — मानो किसी दिव्य अंश ने देह धरी हो। ऐसे जातक असाधारण, युग-प्रभावी व्यक्तित्व होते हैं।
FeelAstro का कैलकुलेटर तीनों ग्रहों की गरिमा-स्थिति जाँचकर इस दुर्लभ योग का परिणाम देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अंशावतार योग क्या है?
उच्च शनि-शुक्र की केंद्र-स्थिति और गुरु-लग्न की विशेष शर्तों से बनने वाला अति-दुर्लभ योग — असाधारण, युग-प्रभावी व्यक्तित्व का सूचक।
शनि-शुक्र का साथ उच्च होना दुर्लभ क्यों है?
दोनों की उच्च राशियाँ (तुला, मीन) एक-दूसरे से षष्ठाष्टक दूरी पर हैं — दोनों का एक साथ उच्च होकर केंद्रों में आना खगोलीय रूप से ही विरल है।
इस योग का फल क्या है?
शास्त्र कहते हैं — शास्त्र-पारंगत, विरक्त होकर भी वैभवी, राजपूजित और कालजयी कीर्ति वाला जातक; तप-रस-ज्ञान तीनों उसमें सधे होते हैं।
क्या यह योग साधारण कुंडलियों में मिलता है?
बहुत कम — यह अपवाद-योगों की श्रेणी में है। न बनने पर कुंडली के व्यावहारिक बल-योग देखें; वही जीवन गढ़ते हैं।
फल कब मिलता है?
शनि-शुक्र-गुरु की दशाओं में परतें खुलती हैं — ऐसे जातकों का प्रभाव प्रायः आयु के साथ बढ़ता जाता है, घटता नहीं।