Web Analytics
FeelAstro feelastro

परिवर्तन योग कैलकुलेटर

परिवर्तन योग (राशि-विनिमय) तब बनता है जब दो ग्रह एक-दूसरे की राशियों में स्थित हों — जैसे मंगल तुला में और शुक्र मेष में। यह दोनों भावों और ग्रहों को गहराई से जोड़ देता है, मानो दोनों ने घर बदल लिए हों।

आपका जन्म विवरण

एक बार भरें — FeelAstro का हर कैलकुलेटर इन्हीं विवरणों का उपयोग करता है, और ये आपकी AI रीडिंग में भी काम आते हैं।

केवल आपके ब्राउज़र सेशन में सहेजा जाता है। सटीक जन्म समय और स्थान से सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं।

हमारे ज्योतिषियों से पूछें

आपका प्रश्न सार्वजनिक पर गुमनाम रहता है — नाम व जन्म विवरण कभी नहीं दिखते। आपकी सहेजी कुंडली निजी रूप से जुड़ती है ताकि ज्योतिषी आपकी वास्तविक कुंडली से उत्तर दे सकें।

🎁 हर बार जब आपका सवाल approve होता है, आपको AI ज्योतिषी से 1 मुफ़्त सवाल मिलता है।

सवाल पूछने के लिए अपना WhatsApp नंबर verify करें — कोई खाता या पासवर्ड नहीं चाहिए, एक कोड से सब हो जाता है।

हम आपको WhatsApp पर 6 अंकों का कोड भेजेंगे। आपका नंबर कभी publicly नहीं दिखता।

पहले से email से FeelAstro इस्तेमाल करते हैं? लॉग इन करें या मुफ़्त खाता बनाएँ

परिवर्तन योग कैलकुलेटर के बारे में

विनिमय में शामिल भावों के अनुसार तीन प्रकार होते हैं: महा परिवर्तन (शुभ भावों — 1, 2, 4, 5, 7, 9, 10, 11 — के बीच) श्रेष्ठ फलदायी; खल परिवर्तन (तृतीय भाव सम्मिलित) मिश्रित; और दैन्य परिवर्तन (6, 8, 12 सम्मिलित) — संघर्ष के बाद फल।

FeelAstro का कैलकुलेटर आपकी कुंडली के सभी राशि-विनिमय खोजकर प्रत्येक का प्रकार, भाव-जोड़ी और फल-टिप्पणी देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिवर्तन योग क्या है?

दो ग्रहों का एक-दूसरे की राशियों में होना — इसे राशि-विनिमय या मutual exchange कहते हैं। यह दोनों ग्रहों/भावों को इतना जोड़ देता है कि एक का फल दूसरे से बंध जाता है।

महा, खल और दैन्य परिवर्तन में क्या अंतर है?

महा — दोनों भाव शुभ (धन-केंद्र-त्रिकोण-लाभ): उत्तम फल। खल — तृतीय भाव शामिल: मेहनत से मिला-जुला फल। दैन्य — त्रिक (6, 8, 12) शामिल: पहले कठिनाई, बाद में परिणाम।

क्या दैन्य परिवर्तन हमेशा बुरा है?

नहीं — दैन्य विनिमय संघर्ष से तपाकर फल देता है, और विपरीत राज योग की स्थितियों में यही विनिमय असाधारण उत्थान भी करा देता है।

परिवर्तन योग कितना प्रबल संबंध है?

ग्रह-संबंधों में विनिमय सबसे प्रबल माना जाता है — युति और दृष्टि से भी गहरा, क्योंकि दोनों ग्रह एक-दूसरे के घर के स्थायी अतिथि हैं।

फल किस दशा में मिलता है?

दोनों विनिमय-ग्रहों की दशाएँ परस्पर जुड़ जाती हैं — किसी एक की दशा में दोनों भावों के फल सक्रिय होते हैं।