रवि योग रिपोर्ट
यह रिपोर्ट सूर्य के आस-पास बनने वाले योगों का समूह-चित्र देती है — सूर्य से द्वितीय में ग्रह (वेशि योग), द्वादश में ग्रह (वोशि योग), दोनों ओर (उभयचरी योग) और सूर्य-बुध युति (नीपुण/बुधादित्य)।
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रवि योग रिपोर्ट के बारे में
ये "सौर-परिवार" योग चंद्र के सुनफा-अनफा के सौर समांतर हैं — सूर्य के आगे-पीछे कौन चल रहा है, इससे आत्म-अभिव्यक्ति का ढंग तय होता है: वेशि विनम्र-सत्यनिष्ठ, वोशि कुशल-यशस्वी, उभयचरी सर्वगुण-संतुलित।
FeelAstro की यह रिपोर्ट चारों की एक साथ जाँच करती है — कौन-सा सौर योग आपकी कुंडली में है, एक क्लिक में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वेशि, वोशि और उभयचरी योग क्या हैं?
सूर्य से द्वितीय भाव में (चंद्र के अतिरिक्त) ग्रह हो तो वेशि, द्वादश में हो तो वोशि, दोनों ओर हों तो उभयचरी — सूर्य के सहचरों से बनने वाले योग।
इन योगों का फल क्या है?
वेशि — सत्यवादी, संतुलित दृष्टि; वोशि — कुशल, स्मृतिवान, यशस्वी; उभयचरी — राजा-सम भोग और सर्वप्रियता। फल सहचर ग्रह के स्वभाव से रंग लेता है।
शुभ और पाप सहचर में अंतर पड़ता है?
बहुत — गुरु-शुक्र जैसे सहचर योग को श्रेष्ठ बनाते हैं; शनि-मंगल सहचर हों तो फल संघर्ष-मिश्रित। रिपोर्ट सहचर ग्रह भी दिखाती है।
चंद्रमा को क्यों नहीं गिनते?
शास्त्रीय नियम — चंद्र सूर्य-प्रकाश का परावर्तक है, स्वतंत्र सहचर नहीं; राहु-केतु छाया होने से वर्जित। यही नियम यह रिपोर्ट लागू करती है।
ये योग कितने सामान्य हैं?
बुध-शुक्र सूर्य के निकट ही रहते हैं, इसलिए कोई-न-कोई सौर योग अधिकांश कुंडलियों में मिलता है — महत्व "कौन-सा और किस ग्रह से" में है।